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वाइगोत्सकी का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत:Vygotsky's theory of cognitive development

 

वाइगोत्सकी का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत:

सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत के नाम से भी जाना जाने वाला, वाइगोत्सकी का सिद्धांत यह बताता है कि बच्चों का संज्ञानात्मक विकास सामाजिक और सांस्कृतिकपरिस्थितियों से गहराई से प्रभावित होता है।


सिद्धांत की मुख्य अवधारणाएं:

  • सांस्कृतिक उपकरण: भाषा, प्रतीक और प्रौद्योगिकी जैसे साधन जो सोच को आकार देते हैं।

  • सामाजिक संपर्क: ज्ञान और कौशल का विकास, अनुभवी व्यक्तियों (जैसे माता-पिता, शिक्षक) के साथ सहयोग और बातचीत के माध्यम से होता है।

  • समीपस्थ विकास का क्षेत्र (ZPD): विकास की क्षमता का स्तर जो स्वतंत्र रूप से प्राप्त करने से अधिक है, सहायता के साथ प्राप्त किया जा सकता है।

  • Saffolding: अधिक जानकार व्यक्ति द्वारा प्रदान किया गया समर्थन जो बच्चों को ZPD में कार्यों को पूरा करने में मदद करता है।

  • आंतरिक भाषण: सोचने का एक आंतरिक रूप जो भाषा के माध्यम से विकसित होता है।

सिद्धांत का महत्व:

  • शिक्षा में, ZPD और Saffolding की अवधारणाएं अनुदेशात्मक रणनीतियों को सूचित करती हैं जो छात्रों को उनकी पूरी क्षमता तक पहुंचने में मदद करती हैं।

  • यह सहयोगात्मक शिक्षण और सामाजिक शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित करता है।

  • संस्कृति और भाषा को बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के रूप में देखा जाता है।

ZPD (समीपस्थ विकास का क्षेत्र) :

ZPD का मतलब है Zone of Proximal Development या समीपस्थ विकास का क्षेत्र। यह रूसी मनोवैज्ञानिक लेव वाइगोत्सकी द्वारा विकसित एक अवधारणा है, जो बच्चों के संज्ञानात्मक विकास को समझने में मदद करती है।

ZPD को उस क्षमता के स्तर के रूप में परिभाषित किया जाता है जो स्वतंत्र रूप से प्राप्त करने से अधिक है, सहायता के साथ प्राप्त किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में, यह वह श्रेणी है जिसमें बच्चे मदद के साथ कार्यों को पूरा कर सकते हैं, लेकिन अकेले नहीं कर सकते।

ZPD के तीन स्तर हैं:

  1. स्वतंत्र प्रदर्शन का स्तर: यह वह स्तर है जिस पर बच्चा बिना किसी सहायता के कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा कर सकता है।

  2. संभावित विकास का स्तर: यह वह स्तर है जिस पर बच्चा मदद के साथ कार्यों को पूरा कर सकता है।

  3. वास्तविक विकास का स्तर: यह वह स्तर है जिस पर बच्चा वर्तमान में कार्यों को पूरा कर सकता है।

  उपरोक्त में से प्रथम दो का अंतर हीं ZPD कहलाता है।

       वायगोत्स्की के अनुसार बच्चे का उचित विकास सामाजिक एवं सामूहिक परिस्थितियों में ही होता है। ZPD शिक्षा में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शिक्षकों को यह समझने में मदद करता है कि छात्र क्या सीखने में सक्षम हैं और उन्हें सफल होने में मदद करने के लिए उन्हें किस प्रकार का समर्थन प्रदान करने की आवश्यकता है।


ZPD का उपयोग करने के लिए, शिक्षक निम्नलिखित कर सकते हैं:

  • छात्रों का मूल्यांकन करें ताकि उनके ZPD का पता लगाया जा सके।

  • ऐसी गतिविधियाँ प्रदान करें जो छात्रों को ZPD में चुनौती दें।

  • Scaffold प्रदान करें, जैसे संकेत, प्रदर्शन, प्रतिक्रिया और अवसर

  • छात्रों को प्रोत्साहित करें और उनकी प्रगति की प्रशंसा करें।

ZPD एक शक्तिशाली उपकरण है जिसका उपयोग शिक्षक छात्रों को उनकी पूरी क्षमता तक पहुंचने में मदद करने के लिए कर सकते हैं।

पियाजे का मानना था कि बच्चे स्वतंत्र रूप से अपनी सोच का निर्माण करते हैं, अनुभव के साथ अनुकूलन करते हुए। वाइगोत्सकी का मानना था कि बच्चे सामाजिक संपर्क और सांस्कृतिक प्रभावों के माध्यम से सीखते हैं।

हालांकि, दोनों सिद्धांत कुछ महत्वपूर्ण समानताएं साझा करते हैं:

  • दोनों मानते हैं कि बच्चे सक्रिय सीखने वाले होते हैं।

  • दोनों मानते हैं कि विकास चरणों में होता है।

  • दोनों मानते हैं कि भाषा संज्ञानात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  • प्रमुख अंतर

  • विशेषता

    पियाजे

    वाइगोत्सकी


    केंद्र

    व्यक्ति

    सामाजिक-सांस्कृतिक बातचीत


    शिक्षा

    स्वतंत्र खोज

    निर्देशित शिक्षा


    ज्ञान

    व्यक्तिगत निर्माण

    सामाजिक रूप से निर्मित


    भाषा

    सोच का उपकरण

    सोच का आधार



अंततः, पियाजे और वाइगोत्सकी के सिद्धांत पूरक हैं। वे बच्चों के संज्ञानात्मक विकास की एक व्यापक समझ प्रदान करते हैं।

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